आँख का इतिहास। प्राचीन काल से ही आँख को लेकर कई विरोधाभासी व्याख्याएँ प्रचलित रही हैं। कई प्राचीन चिकित्सक और दार्शनिक सक्रिय आँख की अवधारणा में विश्वास रखते थे। उदाहरण के लिए, चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में प्लेटो ने लिखा था कि प्रकाश आँख से निकलता है और अपनी किरणों से वस्तुओं को ग्रहण करता है।
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